क्या बदला
एक ही स्रोत के अनुसार, यूरोपीय आयोग ने Treaty on the Functioning of the European Union के Article 102 को दबदबे वाली कंपनियों के बहिष्कारक व्यवहार पर लागू करने से जुड़े दिशानिर्देश अपनाए हैं. इसी स्रोत के अनुसार, आयोग ने वह 2008 गाइडेंस वापस ले ली है जो EC Treaty के Article 82 के तहत दबदबे वाली कंपनियों के बहिष्कारक दुरुपयोग पर प्रवर्तन प्राथमिकताएँ तय करती थी और 2023 में संशोधित हुई थी. एक ही स्रोत के अनुसार, वह 2008 Communication प्रभाव-आधारित (effects-based) दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में योगदान दे चुका था, जो अब EU Courts की case law में स्थापित है.

एक ही स्रोत के अनुसार, नए दिशानिर्देश EU Courts की case law पर आधारित हैं, और इनका उद्देश्य EU प्रतिस्पर्धा नीति के आधुनिकीकरण में योगदान देना तथा यह सुनिश्चित करना है कि Article 102 TFEU आज के कारोबारी यथार्थ को प्रभावी ढंग से संभाल सके.
Highlights
- एक ही स्रोत के अनुसार, यूरोपीय आयोग ने दबदबे वाली कंपनियों के बहिष्कारक व्यवहार पर Treaty on the Functioning of the European Union के Article 102 के अनुप्रयोग से जुड़े दिशानिर्देश अपनाए हैं.
- एक ही स्रोत के अनुसार, आयोग ने 2023 में संशोधित वह 2008 गाइडेंस वापस ले ली है जो EC Treaty के Article 82 के तहत दबदबे वाली कंपनियों के बहिष्कारक दुरुपयोग पर प्रवर्तन प्राथमिकताएँ बताती थी.
- एक ही स्रोत के अनुसार, Article 102 TFEU दबदबे वाली कंपनियों के दुरुपयोगकारी व्यवहार को प्रतिबंधित करता है, जिसमें प्रतिस्पर्धियों को बाज़ार से बाहर करना शामिल है.
- एक ही स्रोत के अनुसार, Article 102 TFEU का प्रवर्तन आयोग और NCAs करते हैं.
- एक ही स्रोत के अनुसार, दिशानिर्देश तीन-वर्षीय प्रक्रिया के बाद अपनाए गए.
किन पर असर और क्या तय होता है
एक ही स्रोत के अनुसार, Article 102 TFEU दबदबे वाली कंपनियों के दुरुपयोगकारी व्यवहार को प्रतिबंधित करता है, जिसमें प्रतिस्पर्धियों को बाज़ार से बाहर करना भी शामिल है. इसी स्रोत के अनुसार, इस प्रावधान का प्रवर्तन आयोग और NCAs, यानी राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा प्राधिकरण, करते हैं. एक ही स्रोत के अनुसार, बहिष्कारक दुरुपयोग के उदाहरणों में predatory pricing, margin squeeze, exclusive dealing और आपूर्ति से इनकार शामिल हैं.
एक ही स्रोत के अनुसार, दिशानिर्देश दबदबे वाली कंपनियों के विशिष्ट प्रकार के व्यवहार के विश्लेषण के लिए ढाँचा तय करते हैं, और वे कंपनियों को यह आँकने में मदद करते हैं कि वे अकेले या अन्य कंपनियों के साथ मिलकर एक या अधिक बाज़ारों में दबदबे की स्थिति रखती हैं या नहीं, जिसमें ecosystems और after-markets से जुड़े मामले भी शामिल हैं. एक ही स्रोत के अनुसार, दिशानिर्देश उन मानदंडों पर मार्गदर्शन देते हैं जिन्हें यह तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए कि कोई व्यवहार गुण-आधारित प्रतिस्पर्धा से अलग हटकर बहिष्कारक प्रभाव पैदा करता है या नहीं. इसी स्रोत के अनुसार, दिशानिर्देश यह भी स्पष्ट करते हैं कि कंपनियाँ अपने व्यवहार को कैसे उचित ठहरा सकती हैं — यह दिखाकर कि वह वस्तुनिष्ठ रूप से आवश्यक है, या ऐसी कार्यकुशलताएँ पैदा करता है जो नकारात्मक प्रभावों से अधिक हैं और उपभोक्ताओं को लाभ देती हैं.
यह कहाँ से आया
एक ही स्रोत के अनुसार, यह अपनाने की प्रक्रिया तीन-वर्षीय रही. इसी स्रोत के अनुसार, आयोग ने मार्च 2023 में call for evidence शुरू किया था, अगस्त 2024 में सार्वजनिक परामर्श किया, और फरवरी 2025 में हितधारक कार्यशाला आयोजित की.
आगे क्या देखें
एक ही स्रोत के अनुसार, आयोग जहाँ उचित हो वहाँ exploitative abuses पर कार्रवाई जारी रखेगा और आगे किसी चरण में इस प्रकार के व्यवहार पर मार्गदर्शन दे सकता है.

